Munshi Premchand Quotes

Munshi Premchand

मुंशी प्रेमचंद

जीवन में सफल होने के लिए आप को शिक्षा की जरुरत है ना की साक्षरता और डिग्री की |

मुंशी प्रेमचंद

सौंदर्य को गहने की जरूरत नहीं है। कोमलता गहनों का वजन सहन नहीं कर सकती |

मुंशी प्रेमचंद

भरोसा प्यार की नीव है | इसके बिना किसी रिश्ते का कोई अस्तित्व ही नहीं |

मुंशी प्रेमचंद

एक कार्यकुशल व्यक्ति की जरुरत हर किसी को होती है, इसलिए वह भूखे पेट तो कभी नहीं रह सकता |

मुंशी प्रेमचंद

धन और करुणा एक दूसरे से पूरी तरह विपरीत हैं

मुंशी प्रेमचंद

विनम्रता के साथजीने वाला व्यक्ति, समाज में सभी का प्रेम मिलता है |

मुंशी प्रेमचंद

दया मनुष्य का स्वाभाविक गुण है, जिसके बिना मनुष्यता अधूरी है |

मुंशी प्रेमचंद

विपत्ति से बढ़कर अनुभव सिखाने वाला कोई विद्यालय आज तक नहीं खुला

मुंशी प्रेमचंद

हम सोचते है की आमिर व्यक्ति बहुत खुश है, पर ऐसा नही, गरीब की समस्या तो सिर्फ भूख है, आमिर व्यक्ति के पास तो ऐसी सैकड़ो समस्याएं है |

मुंशी प्रेमचंद

मनुष्य को देखो, उसकी आवश्यकता को देखो और अवसर को देखो, उसके उपरांत जो उचित समझो, करो।

नमक का दारोगा

मुंशी प्रेमचंद

न्याय और विद्वत्ता, लंबी-चौडी उपाधियाँ, बडी-बडी दाढियाँ, ढीले चोगे एक भी सच्चे आदर का पात्र नहीं है सब में छल भरा हुआ है |

नमक का दारोगा

मुंशी प्रेमचंद

गधा सचमुच बेवकूफ है, या उसके सीधेपन, उसकी निरापद सहिष्णुता ने उसे यह पदवी दे दी है, इसका निश्चय नहीं किया जा सकता

दो बैलों की कथा

मुंशी प्रेमचंद

ऐसा काम ढूँढना जहाँ कुछ ऊपरी आय हो। मासिक वेतन तो पूर्णमासी का चाँद है, जो एक दिन दिखाई देता है और घटते-घटते लुप्त हो जाता है। ऊपरी आय बहता हुआ स्रोत है जिससे सदैव प्यास बुझती है

नमक का दारोगा

मुंशी प्रेमचंद

संसार का तो कहना ही क्या, स्वर्ग में भी लक्ष्मी का ही राज्य है। उनका यह कहना यथार्थ ही था। न्याय और नीति सब लक्ष्मी के ही खिलौने हैं, इन्हें वह जैसे चाहती हैं नचाती हैं

नमक का दारोगा

मुंशी प्रेमचंद

दुनिया हौसलामन्दों के लिए है। उन्हीं के कारनामे, उन्हीं की जीतें याद की जाती हैं

विजय

मुंशी प्रेमचंद

अगर मृत्यु ने छीना होता तो वह सब्र कर लेती। मौत से किसी को द्वेष नहीं होता। मगर स्वार्थियों के हाथों यह अत्याचार असहृ हो रहा था।

माता का ह्रदय

मुंशी प्रेमचंद

दुर्भाग्यवश उसमें वे सभी सद्गुण थे जो जेल का द्वार खोल देते है। वह निर्भीक था, स्पष्टवादी था, साहसी था, स्वदेश-प्रेमी था, नि:स्वार्थ था, कर्तव्यपरायण था। जेल जाने के लिए इन्हीं गुणो की जरूरत है।

माता का ह्रदय

मुंशी प्रेमचंद

कितना बुरा रिवाज है इस समाज का की एक व्यक्ति, जिसके पास फटे कपडे भी नहीं थे तन ढकने को जब वो जिन्दा थी| अब जब वो मर गई तो उसे एक नया कफ़न चाहिए, वो भी उसके साथ जल जायेगा |

कफन

मुंशी प्रेमचंद

कर्तव्य कभी आग और पानी की परवाह नहीं करता. कर्तव्य-पालन में ही चित्त की शांति है |

मुंशी प्रेमचंद

चापलूसी का जहरीला प्याला आपको तब तक नुकसान नहीं पहुंचा सकता जब तक कि आपके कान उसे अमृत समझ कर पी न जाएं |

मुंशी प्रेमचंद

कार्यकुशल व्यक्ति की सभी जगह जरुरत पड़ती है |

मुंशी प्रेमचंद

खाने और सोने का नाम जीवन नहीं है, जीवन नाम है, आगे बढ़ते रहने की लगन का |

मुंशी प्रेमचंद

हमारे सोये हुए धर्म-ज्ञान की सारी सम्पत्ति लुट जाय, तो उसे खबर नहीं होता, परन्तु ललकार सुनकर वह सचेत हो जाता है। फिर उसे कोई जीत नहीं सकता।

मुंशी प्रेमचंद

विलास के प्रेमी सत्य का पालन नहीं कर सकते

मुंशी प्रेमचंद

रोगों का सबसे मूल कारण चिंता है

मुंशी प्रेमचंद

अत्तीत चाहे कैसा भी हो, परन्तु उसकी स्मृतीया बहुत सुखद होती है |

मुंशी प्रेमचंद

अगर दौलत से किसी व्यक्ति को सम्मान मिलता है तो, यह उसका सम्मान नहीं बल्कि उसके दौलत का सम्मान है |

मुंशी प्रेमचंद

मन एक फुर्तीला शत्रु है' जो हमेसा पीछे से वार करता है|

मुंशी प्रेमचंद

लगन को काटो तथा परेशानियों की परवाह नहीं होती |

मुंशी प्रेमचंद

क्रोध में मनुस्य कभी अपने दिल की बात नह करता, बल्कि हमेसा दुसरो का दिल दुखाता है |

मुंशी प्रेमचंद

गरूर, इंसान का सबसे बड़ा दुसमन होता है जो उसे सबसे ज्यादा हानि पहुचाता है |

मुंशी प्रेमचंद

अगर अँधा अंधे को नेतृत्व करेगा तो दोनों खाई में गिरेंगे |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *